Category:
Lifestyle (जीवनशैली)
State:
Delhi
2026-06-07 03:21:14
घटती जन्मदर ने बदली देश की तस्वीर, छोटे परिवार की सोच से युवा बन रहा भारत
घटती जन्मदर ने बदली देश की तस्वीर, छोटे परिवार की सोच से युवा बन रहा भारत
जनसंख्या वृद्धि की रफ्तार धीमी, कार्यशील आयु वर्ग बढ़ा; शिक्षा, रोजगार और सामाजिक बदलाव बने प्रमुख कारण
जयपुर | NMS NEWS
देश में तेजी से बदलते सामाजिक और आर्थिक परिवेश का असर अब जनसंख्या संरचना पर भी स्पष्ट दिखाई देने लगा है। हालिया जनसांख्यिकीय आंकड़ों के अनुसार भारत की जन्मदर लगातार घट रही है, जिसके चलते देश की आबादी में युवाओं और कार्यशील आयु वर्ग की हिस्सेदारी बढ़ी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव आने वाले वर्षों में भारत की अर्थव्यवस्था, रोजगार बाजार और सामाजिक संरचना को नई दिशा देगा।
एक समय था जब बड़े परिवारों को सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक मजबूती का प्रतीक माना जाता था, लेकिन शिक्षा के प्रसार, शहरीकरण और बढ़ती जागरूकता के कारण अब छोटे परिवारों की अवधारणा तेजी से स्वीकार की जा रही है। युवाओं में बेहतर शिक्षा, करियर और जीवन स्तर को प्राथमिकता देने की प्रवृत्ति भी जन्मदर में कमी का महत्वपूर्ण कारण बन रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार देश की लगभग दो-तिहाई आबादी अभी कार्यशील आयु वर्ग में है, जो भारत के लिए जनसांख्यिकीय लाभांश का अवसर प्रस्तुत करती है। यदि इस वर्ग को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास और पर्याप्त रोजगार उपलब्ध कराया जाए तो भारत वैश्विक आर्थिक शक्ति के रूप में और अधिक मजबूत होकर उभर सकता है।
हालांकि जनसंख्या विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी है कि लंबे समय तक जन्मदर में लगातार गिरावट भविष्य में बुजुर्ग आबादी के बढ़ने की चुनौती पैदा कर सकती है। ऐसे में सरकारों को स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा और वृद्धजन कल्याण से जुड़ी नीतियों पर भी समान रूप से ध्यान देना होगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान परिस्थितियों में भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती जनसंख्या की संख्या नहीं, बल्कि मानव संसाधन की गुणवत्ता को बेहतर बनाना है। शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में निवेश ही देश की युवा शक्ति को विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है।
संवाददाता : श्रवण पंवार
जयपुर | NMS.NEWS