Category:
Border Security (सीमा सुरक्षा)
State:
Rajasthan
2026-09-16 04:58:30
जयपुर। वर्षों से लंबित किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए राजस्थान समेत छह राज्यों के बीच मंगलवार, 15 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। समझौते के बाद परियोजना के क्रियान्वयन का रास्ता आगे बढ़ा है।
किशाऊ बांध समझौते से शेखावाटी की जल तस्वीर बदलने की उम्मीद, राजस्थान को मिलेगा 124 एमसीएम पानी
जयपुर। वर्षों से लंबित किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए राजस्थान समेत छह राज्यों के बीच मंगलवार, 15 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। समझौते के बाद परियोजना के क्रियान्वयन का रास्ता आगे बढ़ा है।
परियोजना टौंस नदी पर प्रस्तावित है, जो यमुना की प्रमुख सहायक नदी है। इसका निर्माण हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा क्षेत्र में प्रस्तावित है। परियोजना की अनुमानित लागत करीब 15,000 करोड़ रुपये बताई गई है और इससे 660 मेगावाट जलविद्युत उत्पादन का लक्ष्य है।
राजस्थान के हिस्से में 124 एमसीएम पानी
समझौते के अनुसार राजस्थान को किशाऊ परियोजना से 124 मिलियन क्यूबिक मीटर (एमसीएम) पानी आवंटित किया गया है। प्रस्तावित जल आपूर्ति व्यवस्था के तहत यह पानी यमुना जल परियोजना की पाइपलाइन प्रणालियों के माध्यम से हरियाणा के हांसीवासी क्षेत्र से चूरू तक पहुंचाने की योजना है। इससे सीकर, चूरू और झुंझुनूं सहित शेखावाटी क्षेत्र में पेयजल उपलब्धता को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
पेयजल और सिंचाई दोनों के लिए महत्वपूर्ण
शेखावाटी लंबे समय से जल उपलब्धता की चुनौती से जूझता रहा है। परियोजना पूरी होने पर राजस्थान के निर्धारित हिस्से के पानी का उपयोग पेयजल, सिंचाई और अन्य आवश्यकताओं के लिए किया जा सकेगा। इससे क्षेत्र में जल सुरक्षा के साथ कृषि, उद्योग और आबादी की बढ़ती पानी की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलने की संभावना है।
छह राज्यों के बीच हुआ समझौता
किशाऊ परियोजना के लिए राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली के बीच समझौता हुआ है। परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है और समझौते के बाद इसे केंद्रीय मंत्रिमंडल की स्वीकृति के लिए रखा जाना है।
परियोजना के तहत 232.6 मीटर ऊंचे कंक्रीट ग्रेविटी बांध का प्रस्ताव है। केंद्र सरकार के अनुसार जल घटक की लागत का लगभग 90 प्रतिशत केंद्रीय सहायता से वहन किया जाएगा।
संवाददाता — श्रवण पंवार
जयपुर | NMS.NEWS
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